फिल्म रिव्यू : अलग तरह के लोगों के लिए है ‘मिर्जिया’, ‘रंग दे बसंती’ वाली बात नहीं

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फिल्म का नाम: मिर्जिया
डायरेक्टर: राकेश ओमप्रकाश मेहरा
स्टार कास्ट: हर्षवर्धन कपूर, सैयमी खेर , के के रैना, ओम पुरी
रेटिंग: 1.5 स्टार

मिर्जिया

मिर्जिया का फिल्म रिव्यू

मुंबई। बॉलीवुड में अलग तरह की फिल्में बनाने वाले डायरेक्टर राकेश ओमप्रकाश मेहरा की फिल्म ‘मिर्जिया’ आज बॉक्स ऑफिस पर रिलीज़ हो गई है। इस फिल्म से अनिल कपूर के बेटे हर्षवर्धन कपूर बॉलीवुड में अपना पहला कदम रख रहे हैं। ‘अक्स’, ‘रंग दे बसंती’ और ‘भाग मिलखा भाग’ जैसी फिल्में बना चुके राकेश लंबे अर्से बाद इस फिल्म से वापसी कर रहे हैं।

कहानी

फिल्म की कहानी राजस्थान की पृठभूमि पर बेस्ड है। ये कहानी मिर्जा (हर्षवर्धन कपूर) और साहिबां (सैयमी खेर) की है। दोनों एक दूसरे से बेइंतेहा प्यार करते हैं। मिर्जा और साहिबां का प्यार, साहिबां के घरवालों को मंजूर नहीं था , जिसकी वजह से साहिबां उसका रिश्ता कहीं और तय कर दिया था। जिस कारण से मिर्जा अपनी साहिबां को लेकर भागता है लेकिन एक वक्त के बाद साहिबां उसके तरकश के तीरों को तोड़ देती है और कहानी सिमट के रह जाती है। इसी कहानी को राकेश ओमप्रकाश मेहरा ने आज के युग में भी फिट करने की कोशिश की है जहां मुनीष (हर्षवर्धन कपूर) और सुचीत्रा (सैंयमी खेर) स्कूल के जमाने से एक दूसरे से प्रेम करते हैं लेकिन किन्हीं कारणों से वो बचपन में जुदा हो जाते हैं लेकिन जब दोबारा उनका मिलन होता है, तब तक सुचीत्रा की शादी करन से तय हो जाती है, अब क्या आज के युग में यह प्यार मुकम्मल हो पायेगा, इसका पता आपको फिल्म देखने के बाद ही चलेगा।

डायरेक्शन

राकेश मेहरा का डायरेक्शन लाजवाब है। फिल्म में इस्तेमाल की गईं लोकेशन्स भी कमाल की हैं। फिल्म के कुछ शॉर्ट्स बहुत ही उम्दा हैं। राकेश ने इस फिल्म में कहीं- कहीं पर ‘रंग दे बसंती’ वाला फील देने की कोशिश की है लेकिन इस बार वो उतने सफल नहीं रहे।

एक्टिंग

पहली फिल्म होने के बावजूद दोनों एक्टर्स हर्षवर्धन कपूर और सैयमी खेर ने बहुत अच्छा काम किया है। दोनों ने अपने कैरेक्टर को अच्छे से पकड़ा है और उसमें पूरी तरह से ढल गए हैं। फिल्म की बाकी कास्ट ने भी अच्छा काम किया है।

म्यूजिक

फिल्म में गानों का ओवरडोज़ है। हालांकि गुलजार की लिखावट, शंकर एहसान लॉय का संगीत और एक से बढ़कर एक सिंगर्स की आवाज फिल्म के गानों को बहुत खूबसूरत रूप दिया है। लेकिन इतने गानों की जरूरत नहीं थी।

देखें या नहीं

थोड़ी अलग है ये फिल्म। एक खास तरह की ऑडिएंस ही इसे पसंद कर पाएगी। अगर आर्ट फिल्मों के शौकीन हैं या कुछ अलग देखना चाहते हैं तो ये फिल्म देखी जा सकती है।

 

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