खूंखार अपराधियों के बीच जेल में उम्रकैद की सज़ा काट रहे सुरेश ने किया टॉप, मिला गोल्ड मैडल

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वाराणसी। अगर सच्ची लगन से कोई काम किया जाए तो उसे पूरा होने से कोई नहीं रोक सकता। ये बात साबित की है उम्रकैद की सज़ा काट रहे एक कैदी ने। वाराणसी जेल में बंद उम्रकैद की सजा भुगत रहे सुरेश ने जेल से ही अपनी पढ़ाई जारी रखी और आज वो गोल्डमेडलिस्ट की कैटेगरी में शामिल हो गए हैं। उसे इग्नू से डिप्लोमा इन टूरिज्म स्टडीज में 2016 में इण्डिया में टॉप करने पर गोल्ड मैडल दिया गया।

उम्रकैद की सजा भुगत रहे सुरेश

उम्रकैद की सजा भुगत रहे सुरेश को गोल्ड मेडल विश्व के जाने-माने यूनिवर्सिटी काशी हिन्दू विश्वविद्यालय के कुलपति गिरीश चंद्र त्रिपाठी के हाथों मिला है। हालांकि इस दौरान कई अन्य छात्रों को भी गोल्ड मैडल से सम्मानित किया गया लेकिन जेल में रहकर विषम परिस्थितियों में अपना मुकाम हासिल करने वाले सुरेश के संघर्ष की चर्चा हर जुबान पर है।

क्या है पूरा मामला

दरसअल, वाराणसी से सटे हुए जिले गाजीपुर के सैदपुर के रहने वाले सुरेश राम अपने पट्टीदारों से जमीन के विवाद के कारण हुई मौत मामले में दोषी करार दिए गए थे और उनको उम्रकैद की सजा मिली थी। सुरेश को ये ख्याल आया कि क्यों न समाज के लिए एक नया मैसेज दिया जाये और लोगों को ये मालूम हो कि जेल में सिर्फ खूंखार कैदी ही नहीं बल्कि शिक्षा को पूजने वाले भी हैं।

बाकी कैदियों से अलग था सुरेश

सुरेश ने बताया कि जेल में सभी कैदियों से उसको पढ़ाई में सहयोग मिला। सुरेश के अनुसार उसके अलावा जेल में अन्य कई कैदी भी पढ़ाई कर रहे हैं। हत्या के मामले में सुरेश व उसके पिता, भाई व अन्य कई लोगों को सजा हुई थी। वहीं, इग्नू की ओर से सुरेश और अन्य कैदियों को शिक्षा देने सेंट्रल जेल जाते रहे यूपी कॉलेज के प्रोफ़ेसर डॉ पवन कुमार सिंह ने बताया कि सुरेश अन्य विद्यार्थियों से अलग था। यह सुबह 3 बजे उठ जाता था और क्रिकेट आदि खेल खेलने के बाद पढ़ाई में जुट जाता था।

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